लॉकडाउन से देश के 53 हजार होटल व 5 लाख रेस्टोरेंट बंद, 3.5 करोड़ लोगों की नौकरी पर संकट


लखनऊ। कोरोना संक्रमण के चलते होटल इंडस्ट्री आईसीयू में पहुंच गई है। देश के करीब 53 हजार होटलों व लगभग पांच लाख रेस्टोरेंट में ताला पड़ गया है। पूरे देख में इससे करीब तीन करोड़ लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ है। फेडरेशन आफ होटल एण्ड रेस्टोरेंट एसोसिएशन आफ इण्डिया (एफएचआरएआई) ने लॉकडाउन से होटल, ट्रैवल्स व टूरिज्म को तीन लाख करोड़ रुपए के नुकसान की बात कही है। यूपी के करीब 20 हजार तथा लखनऊ के लगभग 850 होटलों भी ताला बंद है। लखनऊ में होटल इण्डस्ट्री को अब तक एक हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है।
  
देश में होटल इण्डस्ट्री अब तक के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। कोरोना संक्रमण से जो स्थिति बनी है विशेषज्ञ उससे इसके वर्ष के अंत तक न उबरने की बात कह रहे हैं। एफएचआरएआई इसको लेकर रोजाना इण्डस्ट्री के लोगों के साथ वेबनार कर रहा है। इससे बाहर निकालने के तरीकों पर बात हो रही है। उसने प्रधाानमंत्री को भी ज्ञापन भेजा है। ऐसोसिएशन से जुड़े सदस्य केवल होटल इण्डस्ट्री को ही करीब एक लाख 60 हजार करोड़ के नुकसान की बात कह रहे हैं। जबकि पर्यटन, टूर व ट्रैवल्स को जोड़कर तीन लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान बताया जा रहा है। उनके मुताबिक पूरे देश में होटल कारोबार से जुड़े करीब साढ़े तीन करोड़ लोगों की जॉब पर संकट है। एफएचआरएआई के निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष गिरीश ओेबेराय कहते हैं कि दिन ब दिन आंकड़े बदल रहे हैं। रोजाना नुकसान का आंकलन किया जा रहा है।
 
यूपी में 20 हजार होटल बंद, 30 लाख लोगों का रोजगार प्रभावित


यूपी के होटल इण्डस्ट्री की हालत भी देश से अलग नहीं है। यूपी में करीब 20 हजार होटल प्रभावित हुए हैं। यूपी में इस इण्डस्ट्री को करीब 16 हजार करोड़ रूपए के नुकसान की बात कही जा रही है। इस इण्डस्ट्री से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े करीब 30 लाख लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ है। यूपी होटल एण्ड रेस्टोरेंट एसोसिएशन (यूपीएचआरए) के ज्वाइंट सेक्रेटरी के श्याम कृष्णानी कहते हैं कि होटल इण्डस्ट्री के 95 प्रतिशत कर्मचारी खाली बैठ गये हैं। इनके पास कोई काम नहीं है। 
 
होटल का 99 प्रतिशत स्टाफ रहता है बाहर, लाक डाउन के बाद सब गए घर
होटलों व रेस्ट्रोरेंट में काम करने वाला 99 प्रतिशत स्टाफ होटल के बाहर ही रहता है। होटल में उन्हें रहने की इजाजत नहीं होती है। यूपी होटल एण्ड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के ज्वाइंट सेक्रेटी श्याम कृष्णानी खुद कहते हैं कि होटलों में काम करने वालों को अन्दर रहने की इजाजत नहीं होती है। स्टाफ बाहर किराए पर रहता है। जिसकी जब ड्यूटी होती है उस हिसाब से आता है। उन्होंने बताया लाक डाउन होने के बाद लगभग स्टाफ अपने गावं-घर चला गया। जब प्रशासन ने कुछ होटलों को डाक्टरों के लिए अधिग्रहित किया तो बहुत मामुली स्टाफ बुलाया गया था। आस पास के लोग ही आ पाए। गार्ड व सफाई कर्मचारी ही ड्यूटी पर आ रहे हैं। ओवर आल करीब पांच प्रतिशत कर्मचारी काम कर रहे हैं। 95 प्रतिशत खाली व बेरोजगार हो गए हैं। वह कहते है कि जो कर्मचारी रुके हैं उनके खाने का इंतजाम कराया जा रहा है। 
 
लखनऊ में साढ़े आठ सौ होटलों में काम करते थे 20 हजार लोग
राजधानी के छोटे बड़े करीब 850 होटलों में सीधे तौर पर करीब 20 हजार लोग जाब करते थे। जबकि लगभग एक लाख से ज्यादा अन्य लोगों को भी होटलों की वजह से रोजगार मिलत है। इन दिनों यह सभी बेरोजगार हो गये हैं। केवल सफाई कर्मी, गार्ड काम कर रहे हैं।  
 
लखनऊ में सालाना 3000 करोड़ का कारोबार
लखनऊ में अकेले होटल इण्डस्ट्री में सालाना करीब 3000 करोड़ का कारोबार होताा है। अमूमन औसतन प्रति माह 250 करोड़ का कारोबार होता है। लेकिन शादी, सहालग व विशेष आयोजनों वाले महीनों में प्रतिमाह 500 करोड़ रुपए तक कारोबार होता है। एसोचैम ने फरवरी 2020 में डिफेंस एक्सपो के आयोजन के चलते लखनऊ में होटल इंडस्ट्री के 500 करोड़ रुपए के कारोबार की बात कही थी। लॉकडाउन की वजह से अब तक लखनऊ के होटल कारोबार को करीब 1000 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। लखनऊ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेन्द्र शर्मा कहते हैं कि लखनऊ की हालत देश से अलग नहीं है। इण्डस्ट्री पूरी तरह बैठ गयी है। लोग बेरोजगार हो गये हैं। 
 
होटल कारोबारियों को सहायता के वेंटिलेटर की जरूरत
आईसीयू में पहुंचे होटल कारोबार को मदद के वेंटिलेटर की जरूरत है। लखनऊ होटल एण्ड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा कहते हैं होटल कारोबारियों को तमाम टैक्स देना पड़ रहा है। सरकार को बिजली का बिल, लाइसेंस शुल्क, जीएसटी, लग्जरी टैक्स तथा हाउस टैक्स में छूट देने पर विचार करना चाहिए। फेडरेशन आफ होटल एण्ड रेस्टोरेंट एसोसिएशन आफ इण्डिया (एफएचआरएआई) के निवर्तमान अध्यक्ष व उत्तर प्रदेश होटल एण्ड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष गिरीश ओबेराय कहते हैं कि फेडरेशन ने पीएम को भी ज्ञापन भेजा है। 
 
लॉकडाउन से पहले व जून तक किसी होटल में नहीं थी जगह
यूपी होटल एण्ड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के प्रदेश संयुक्त सचिव श्याम कृष्णानी कहते हैं कि फरवरी से जून और अक्तूबर से दिसम्बर तक का समय होटल इण्डस्ट्री के लिए स्वर्णिम होता है। इसी दौरान सबसे ज्यादा कारोबार होता है। लेकिन इस बार कोरोना की वजह पूरी सहालग चली गयी। लाक डाउन से पहले लखनऊ के लगभग सभी होटल फुल थे। लेकिन जून तक की सभी बुकिंग कैंसिल हो गयी हैं।
 
14 करोड़ रुपए लौटाना पड़ा
गाजियाबाद के एक फाइव स्टार होटल ने अप्रैल तक की बुकिंग के लिए करीब 14 करोड़ रुपए जमा कराए थे।  अब उसने बकिंग कराने वालों को आन लाइन यह पैसा वापस कर दिया। होटल से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि होटल जून तक एक भी दिन खाली नहीं था। एक दिन दिन में कई कई शादी समारोह व अन्य आयोजन बुक थे। हर महीने होटल के कर्मचारियों को करीब 3.25 करोड़ रुपए वेतन देना पड़ता है। आगे की स्थिति बहुत खराब होने जा रही है। 
 


राजधानी लखनऊ में होटलों की संख्या लगभग- 850
राजधानी में फाइव, फोर व थ्री स्टार होटल लगभग-30
होटल और रेस्टोरेंट में रोजगार पाने वालों की संख्या- लगभग 20,000
 
होटल इण्डस्ट्री को इस झटके से उबरने में बहुत वक्त लगेगा। इतने बड़े नुकसान की किसी ने कल्पना नहीं की थी। इण्डस्ट्री के उबारने के लिए सरकार के मदद की जरुरत पड़ेगी। इण्डस्ट्री से जुड़े देश भर के करीब साढ़े तीन करोड़ लोग बेरोजगारी के मुहाने पर खड़े हो गए हैं। 
गिरीश ओबेराय, निवर्तमान अध्यक्ष, फेडरेशन आफ होटल एण्ड रेस्टोरेंट एसोसिएशन आफ इण्डिया (एफएचआरएआई) व अध्यक्ष उत्तर प्रदेश होटल एण्ड रेस्टोरेंट एसोसिएशन