कोरोना मरीज मिलने पर अब पूरा अस्पताल नहीं 24 घंटे के लिए बंद होगा सिर्फ वार्ड

प्रमुख सचिव स्वास्थ अमित मोहन प्रसाद की ओर से प्राइवेट व सरकारी अस्पतालों के लिए गाइडलाइन जारी कर दी गई हैं। 



लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नॉन कोविड अस्पतालों में अब कोरोना से संक्रमित कोई मरीज मिला तो पूरा अस्पताल सील नहीं किया जाएगा, सिर्फ चौबीस घंटे के लिए वार्ड बंद होगा और आसपास के मरीजों को आइसोलेशन वार्ड में भेजकर उनकी कोरोना वायरस की जांच कराई जाएगी। कोरोना संक्रमित मरीज के संपर्क में आए दूसरे मरीजों को रिपोर्ट निगेटिव आने पर भी उन्हें एहतियात के तौर पर 14 दिनों के क्वारंटाइन में रखा जाएगा।


प्रमुख सचिव स्वास्थ अमित मोहन प्रसाद की ओर से प्राइवेट व सरकारी अस्पतालों के लिए गाइडलाइन जारी कर दी गई हैं। दरअसल बीते दिनों नॉन कोविड अस्पतालों में कोरोना मरीज मिलने पर अस्पताल सील हुए थे और निजी चिकित्सकों पर कार्रवाई भी की गई थी। इसके बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने दोहरी नीति पर सवाल उठाए थे। अब उन्हें राहत दे दी गई है। इसके तहत अब अगर किसी नॉन कोविड प्राइवेट या सरकारी अस्पताल में कोई कोरोना पाजिटिव मरीज मिलता है तो वह अस्पताल तुरंत सीएमओ को जानकारी देकर कोविड 19 रोगियों के लिए तैयार विशेष एंबुलेंस से उन्हें कोविड-19 अस्पताल पहुंचाएगा।


इस संक्रमित मरीज के आगे-पीछे, दाएं और बाएं जो दूसरे मरीज होंगे, उन्हें तुरंत आइसोलेशन वार्ड में भेजा जाएगा और हाई रिस्क मरीज के तौर पर चिन्हित कर पांचवें दिन के बाद कोरोना की रियल टाइम पेरीमिरेज चेन रिएक्शन (आरटीपीसीआर) जांच कराई जाएगी। अगर इनकी जांच रिपोर्ट निगेटिव आई तो भी 14 दिन के क्वारंटाइन में रखा जाएगा और अगर इस दौरान लक्षण मिले तो 14वें दिन दोबारा आरटीपीसीआर जांच करवाई जाएगी। वहीं वार्ड के दूसरे मरीजों को लो रिस्क कॉन्टैक्ट के रुप में चिन्हित कर दूसरे वार्ड में भेजा जाएगा।


हाई रिस्क वाले मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव आने पर लो रिस्क वाले मरीज भी समय पर अस्पताल से छुट्टी पाएंगे। इसी तरह चिकित्सक और वार्ड में तैनात कर्मियों के लिए भी व्यवस्था होगी। वहीं वार्ड को 24 घंटे के लिए बंद कर कम से कम दो बार सैनिटाइज किया जाएगा। वार्ड में रखे समस्त उपकरणों को भी सैनिटाइज किया जाएगा। सभी प्राइवेट व सरकारी अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं कि वह ऐसे मरीजों को ही भर्ती करें जिनका इलाज परामर्श के उपरांत घर पर संभव नहीं है। सिर्फ बहुत जरूरी होने पर ही मरीज की सर्जरी की जाएगी। सर्जरी करते समय डाक्टर अनिवार्य रूप से पीपीई किट पहनेंगा। जो सर्जरी बहुत जरूरी नहीं हैं, वह लॉकडाउन के बाद ही होगी। जिला स्तर पर बनाई गई कमेटियां निजी अस्पतालों का औचक निरीक्षण करेंगी। अगर कोई कमी पाई गई तो सीएमओ तत्काल कार्रवाई करेंगे।