कर्म है गीता का उपदेश महाभारत है शांति संदेश, रामनगरी से न‍िकला था महाभारत का यह संदेश

महाभारत धारावाहिक गीत पंडित किरण मिश्रा द्वारा लिखित -महाभारत सीरियल का यह मशहूर गीत रामनगरी की मिट्टी में उपजे पं. किरण मिश्र ने लिखा है।



अयोध्या ।  महाभारत तो अपनी सामरिक प्रबलता के लिए जाना जाता है, पर इस युद्ध के पीछे शांति का संदेश है। यह उद्घोषणा रामनगरी की मिट्टी से उपजे जाने-माने गीतकार पं.किरण मिश्र की है। उनका यह विश्लेषण निरी बौद्धिकता ही नहीं है, बल्कि पूरी प्रामाणिकता से घर-घर स्वीकृत-शिरोधार्य है।


साढ़े तीन दशक पूर्व मशहूर फिल्म निर्माता बीआर चोपड़ा ने महाभारत सीरियल का निर्माण किया और इस सीरियल के प्रत्येक एपिसोड का समापन पं. किरण मिश्र के इस गीत के साथ होता रहा, महाभारत सा युद्ध न हो/ न हो अन्याय की कोई बात/ चलो हम हो लें उसके साथ/ करे जो कृष्ण की जैसी बात/ कर्म है गीता का उपदेश/ महाभारत है शांति संदेश। कृष्ण के सच्चे अनुगामी की तरह युद्ध में भी शांति का संदेश गढऩे वाले किरण मिश्र को यह संस्कार रामनगरी और पिछली शताब्दी में इस नगरी के पर्याय रहे मशहूर संगीतज्ञ एवं शास्त्रज्ञ पिता दिनेश पंडित से विरासत में मिला।


नौकरी छोड़कर बॉलीवुड का क‍िया रुख


गोरखपुर विश्वविद्यालय में व्याख्याता रहे पं. किरण मिश्र को संगीत और कला विरासत में मिली थी। अध्यापन के दिनों में ही उनकी इस प्रतिभा के मुरीदों में रजत पट के प्रख्यात आर्ट डाइरेक्टर ललित नाग भी शामिल हुए और नाग की ही प्रेरणा से पं. किरण मिश्र आर्ट डाइरेक्शन की ओर उन्मुख हुए। आर्ट डाइरेक्टर के तौर पर रानी और लाल परी, डाकू और महात्मा और लेकिन जैसी फिल्मों में छाप छोडऩे वाले किरण मिश्र की व्यस्तता ऐसी बढ़ी कि उन्हें 1975 में गोरखपुर विश्वविद्यालय की नौकरी छोड़ कर पूर्णत: बॉलीवुड का ही हो जाना पड़ा, लेकिन फिल्म में आर्ट डाइरेक्शन के साथ उन्होंने गीत भी लिखे, जिसे स्वर मशहूर गायक महेंद्र कपूर ने दिया।


धीरे-धीरे गीतकार के तौर पर भी मिश्र की पहचान मुकम्मल हुई और साढ़े तीन दशक पूर्व रिलीज हुईं गांव-गांव गंगा बहे, सरयू तीरे एवं प्यार का सावन जैसी फिल्मों के सभी गाने लिखकर पं. किरण मिश्र ने अपनी प्रतिभा का सिक्का जमा दिया। इसके बाद का उनका सफर स्वर्णिम रहा। एक ओर वीनस जैसी मशहूर म्यूजिक कंपनी ने गीतकार के तौर पर उन्हें एक दशक के लिए अनुबंधित किया। इसके बाद वे भक्ति गीतों के पर्याय बन कर स्थापित हुए। सत्यनारायण व्रत कथा और महिमा शेरा वाली की जैसी भक्ति प्रधान फिल्मों के अलावा उन्होंने सिया के राम, दया सागर, महिमा शनिदेव की जैसे धारावाहिकों के लिए प्रवाहमय गीत लिख कर छाप छोड़ी।