इसलिए कुंभकर्ण को मिला था सोने का वरदान


कोरोनावायरस लॉकडाउन में सभी जमकर रामायण का आनंद ले रहे हैं। ऐसे में रामायण में  रावण के भाई और सबसे ज्यादा सोने वाले किरदार कुंभकर्ण को लेकर सभी लोग जानना चाहते हैं। ऐसा कहा जाता है कि कुंभकर्ण एक दिन छोड़कर साल भर सोता था। यही नहीं वो बहुत खाता भी था। कुंभकर्ण के सोने के बारे में कहा जाता है कि कुंभकर्ण 6 महीने बाद 1 द‌िन जागता था।


इसके बाद भोजन करके वह फिर से सो जाता था। इसके पीछे कहा जाता है कि कुंभकर्ण ने ब्रह्मा जी की तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उनसे वरदान मांगने के लिए कहा। कुंभकर्ण इंद्रासन मांगना चाहता था, लेकिन इंद्रासम की जगह कुंभकर्ण ने निद्रासन मांग लिया। ऐसा कहा जाता है कि जब कुंभकर्ण वरदान मांग रहा था तो सरस्वती उसकी जबान पर बैठ गईं, जिससे उसने इंद्रासान की बजाए निद्रासन मांग लिया। इसी वरदान के कारण वो सोता रहता था। 


कुंभकर्ण के बारे में यह भी कहा जाता है कि कुंभकरण का जब जन्म हुआ तो वह कई लोगों को खा गया था। इसके बाद सभी देवता बहुत भयभीत हो गए और उन्होंने इंद्र से इसके लिए मदद मांगी, और जब कुंभकर्ण और इंद्र में युद्ध हुआ तो कुंभकर्ण जीत गया। कुंभकर्ण को तमाम वेदों और धर्म-अधर्म की जानकारी थी। वह भूत और भविष्य का ज्ञाता था। अंत में भगवान राम ने उसका अंत कर दिया।