इस व्रत में की गई साधना कभी व्यर्थ नहीं जाती


कालाष्टमी व्रत जीवन के सभी कष्ट दूर करता है। यह व्रत प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी को देवाधिदेव भगवान शिव के अवतार भगवान भैरव को समर्पित है। इस पवित्र व्रत के फल से व्रती को किसी प्रकार की नकारात्मक शक्ति का प्रभाव नहीं पड़ता है। मान्यता है कि इस व्रत में की गई साधना कभी व्यर्थ नहीं जाती है। इस दिन व्रत रखकर विधि-विधान से काल भैरव की आराधना करने से सारे कष्ट मिट जाते हैं। यह व्रत रोग-व्याधियों को दूर करता है और प्रत्येक कार्य में सफलता दिलाता है।


भगवान भैरव, भगवान शिव के रौद्र रूप माने जाते हैं। इनकी उपासना से सारे भय दूर हो जाते हैं और अदम्य साहस की प्राप्ति होती है। भगवान भैरव की उत्पत्ति भगवान शिव के क्रोध से हुई। इसलिए उन्हें रुद्रांश या शिवांश भी कहा जाता हैं। भगवान काल भैरव मां दुर्गा के पुजारी हैं। कालाष्टमी के दिन कालभैरव और मां दुर्गा की पूजा अवश्य करनी चाहिए। इस रात मां काली की उपासना करने वालों को अर्द्धरात्रि के बाद मां की उसी प्रकार से पूजा करनी चाहिए, जिस प्रकार दुर्गा पूजा में मां कालरात्रि की पूजा का विधान है। इस व्रत में रात्रि में माता पार्वती और भगवान शिव की कथा सुनकर जागरण करना चाहिए। इस दिन श्वान को भोजन कराना शुभ माना जाता है।


इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।