हवा में कितनी दूर तक जा सकता है कोरोना वायरस?

 वैज्ञानिकों का भी मानना है कि 6 फीट की दूरी बनाए रखना समझदारी के साथ-साथ ज़रूरी भी है।हालांकि कई लोगों का कहना है कि और ज़्यादा दूरी बनाना बेहतर है।



कोरोना वायरस का कहर दुनियाभर में तेज़ी से फैल रहा है। इसलिए WHO से लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय तक सभी लोगों को ज़रूरी दिशानिर्देशों को फोलो करने के लिए कहा जा रहा है। जिसमें से सबसे ज़रूरी है सार्वजनिक स्थानों पर आपस में कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखना। ऐसा इसलिए ताकि अगर कोई कोरोना वायरस से संक्रमित है और खांसता या छीकता है तो उसके मुंह से निकली बूंदों से आप उस वायरस के चपेट में न आएं। 


यहां तक कि, वैज्ञानिकों का भी मानना है कि 6 फीट की दूरी बनाए रखना समझदारी के साथ-साथ ज़रूरी भी है। हालांकि, कई लोगों का कहना है कि और ज़्यादा दूरी बनाना बेहतर होगा। 6 फीट कोई जादुई अंक नहीं है जो इस ख़तरनाक वायरस से बचाव का दावा करता है।


रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र, उस उपाय का उपयोग करने वाले संगठनों में से एक, का 6 फीट की दूरी बनाए रखने के विचार पर मानना है कि खांसी या छींकने पर सबसे बड़ी बूंदें जो लोगों के मुंह या नाक से बाहर निकलती हैं, वे छह फीट के भीतर ज़मीन पर गिर जाती हैं। इसलिए कम से कम 6 फीट की दूरी बनाना ज़रूरी है।


हालांकि, कई वैज्ञानिक, हवा के बहाव के अध्ययन को समझने के बाद एरोसोल नामक छोटे कणों के बारे में चिंतित हैं। कितनी दूरी बनाए रखना है ये कई चीज़ों पर आधारित होता है, जैसे आप बाहर खड़े हैं या फिर बंद कमरे में।


ऐसे में ये साफ है कि आपस में दूरी बनाए रखने के बावजूद आपका कोरोना वायरस से संक्रमित होना मुमकिन है। इसलिए सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार ज़्यादा से ज़्यादा समय घर पर बिताएं। जब तक कोई ज़रूरी काम न हो घर से बाहर न निकलें। इसके अलावा घर पर हर थोड़ी देर में साबुन या सैनिटाइज़र से हाथों को धोएं। घर के दरवाज़ों के हैंडल, टेबल जैसी सतह को भी सैनिटाइज़ करें।