छोटी-छोटी बातों पर डरना या स्ट्रेस लेना बढ़ा सकते है पैनिक अटैक का खतरा


कहते हैं कि हर इंसान का अपना दायरा होता है यानी किसी के लिए कोई बात कितनी महत्व रखती है यह उस व्यक्ति के स्वभाव, मानसिक स्थिति आदि पर निर्भर करती है। जैसे, घर के सदस्य को चोट लगने पर कोई व्यक्ति इसे एक छोटा-सा हादसा मानकर उसके इलाज के तरीकों में लग जाता है जबकि किसी और व्यक्ति के लिए यह बात किसी बड़े हादसे की तरह हो सकती है और उसे यह देखते ही पैनिक अटैक हो जाता है। वह डर, चिंता से अलग-सा व्यवहार करने लगता है। आपके आसपास भी अगर कोई व्यक्ति है, जिसे पैनिक अटैक की समस्या है, तो ये खास बातें आपकी मदद कर सकती हैं। पहले जान लेते हैं कि पैनिक अटैक आखिर क्या है? 


क्या है पैनिक अटैक 
पैनिक अटैक चिंता और डर की अचानक शुरुआत है। पैनिक अटैक आमतौर पर अचानक होने वाली अवस्था है और जिन्हें पैनिक अटैक का अनुभव होता है, वे जानते हैं कि इनसे निपटना आसान नहीं है। 


पैनिक अटैक के लक्षण क्या हैं? 
आमतौर पर सीने में दर्द, चक्कर आना, सांस लेने में तकलीफ और दुख का अनुभव होना, कभी-कभी दुख का ऐसा अनुभव होता है कि लगने लगता है कि जिंदगी अब खत्म होने वाली है। कहा जाता है कि यदि आप पैनिक अटैक से जुड़े 12 लक्षणों में से किसी चार का अनुभव करते हैं, तो आप पैनिक अटैक की चपेट में आ सकते हैं। इसके आमतौर पर 12 लक्षण हैं-


पसीना आना
-घबराहट 
-सिहरन
-सांस की तकलीफ 
-दम घुटना
-मतली और पेट में दर्द
-चक्कर आना या हल्का-हल्का महसूस होना
-ठंड लगना
-स्तब्ध हो जाना या झुनझुनी सनसनी
-अस्वस्थता महसूस करना या खुद से अलग महसूस करना
-नियंत्रण खोने का डर
-मरने का डर


पैनिक अटैक के समय इन बातों का रखें ध्यान
गहरी, धीमी सांसें लेनेे से आपकी हृदय गति भी कम हो जाएगी।
घबराहट के दौरान सबसे अच्छा उपकरण धीमी श्वास है।
पैनिक अटैक से जुड़े नकारात्मक विचारों को छोड़कर उन बातों को याद करें, जो आपको खुशी देती हैं।


मदद मांगने में कोई बुराई नहीं 
जिन्हें पैनिक अटैक की वजह से जीवन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें यह समझना चाहिए कि अपने दोस्तों या विश्वासपात्र लोगों से मदद मांगने में कोई बुराई नहीं है। हेल्प थेरेपी आपको पैनिक अटैक से बचाने में कारगर हो सकती है। विशेषज्ञ की मदद भी ली जा सकती है, वो आपको बताएगा कि चिंता को कैसे दूर किया जाए। अध्ययनों में चिकित्सा के ऐसे रूप पाए गए हैं, जो लोगों की फीलिंग जानकर उन्हें उस हिसाब से ट्रीटमेंट देते हैं क्योंकि हम सभी का व्यक्तित्व अलग है। पैनिक अटैक को नियंत्रित करने में मदद के लिए दवा का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि आप केवल चिकित्सक के परामर्श से दवाएं लें।