अब अपनों के अंतिम संस्कार में भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से शामिल हो रहे लोग


नई दिल्ली। कोरोना वायरस इस कदर कहर बरपा रहा है कि लोग अंतिम सांसें गिन रहे अपने परिजनों को अलविदा तक कहने को तरस गए हैं। बहुत से लोग अपनों की अंत्येष्टि में शामिल नहीं हो पा रहे हैं, तो कुछ लोंगों को अंतिम संस्कार के लिए जरूरी सामान की किल्लत से जूझना पड़ रहा है। दरअसल इस महामारी को फैलने से रोकने के लिए सामाजिक मेलजोल से दूर रहने के बारे में कई दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। लोग इनका पालन करने की भी पूरी कोशिश कर रहे हैं। दोस्त, रिश्तेदार और पड़ोसी दुख की इस घड़ी में चाहकर भी पीड़ित परिवार के पास हिम्मत बंधाने नहीं जा पा रहे हैं। लोग अंत्येष्टि कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये शामिल हो रहे हैं। इसके विपरीत गांव-देहात में प्रौद्योगिकी से वंचित लोग खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं।


जनाजे में लोगों की संख्या घटी : पंजाब के लुधियाना शहर के श्मशान घाट (मुक्ति धाम) के संरक्षक राकेश कपूर के मुताबिक, जनाजे में आने वाले लोगों की संख्या 100 से घटकर महज 20 रह गई है।


अभिनेता ने साझा की वेदना : अभिनेता संजय सूरी को भी इन्हीं परेशानियों का सामना करना पड़ा जब उनकी पत्नी की दादी मां का निधन हो गया। सूरी ने ट्वीट किया-जूम के जरिये अंत्येष्टि में शामिल होना बहुत ही अजीब सा था।


कोरोना मरीजों का शव दफनाया


मुंबई के सबसे बड़े कब्रिस्तान के न्यासी शोएब खातिब ने कहा कि हमने ऐसे तीन स्थानों की पहचान की है जहां सिर्फ कोरोना से मरने वालों के शवों को ही दफनाया जा रहा है। 15 साल तक उस कब्र को कोई नहीं छूएगा।


ठेले पर लादकर ले गए शव


यूपी के पीलीभीत जिले में पिछले सप्ताह 70 वर्षीय अजीज की मौत के बाद उनके शव को परिजन कब्रिस्तान तक एक ठेले पर लादकर ले गए। कोलकाता में तो लोगों को शवों को शवदाह गृह या कब्रिस्तान तक लेकर जाने के लिए वाहन नहीं मिल रहे हैं।


अंतिम संस्कार के लिए जरूरी वस्तुओं का टोटा


कर्नाटक के चामराजपेट स्थित हरिश्चंद्र घाट पर अंत्येष्टि का प्रबंधन करने वाले किरन कुमार ने कहा कि इस समय हमें अंतिम संस्कार के लिए जरूरी वस्तुएं जैसे- लकड़ियां, घी, डीजल आदि नहीं मिल पा रही हैं।