6 घंटे तक सूली पर लटकाए गए थे ईसा मसीह, तो फिर क्यों कहते हैं इसे ‘गुड’ फ्राइडे


कोरोना वायरस लॉकडाउन के चलते हर त्योहार का रंग फीका पड़ गया है। ऐसे में कल गुड फ्राइडे पर सभी धार्मिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं। बहरहाल, गुड फ्राइडे को ईसा मसीह के बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता है लेकिन अक्सर मन में ख्याल आता है कि अगर इस दिन ईसा मसीह ने दुनिया को अलविदा कहा था, तो फिर इसे गुड फ्राइडे क्यों कहा जाता है? 


क्यों कहते हैं गुड फ्राइडे 
ईसा मसीह ने मानवता की भलाई के लिए अपनी जान को दांव पर लगा दिया था, इस कारण इसे प्रेरणास्रोत के तौर पर ‘गुड फ्राइडे’ कहा जाता है। उनका आचरण धर्म और सच के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। ईसाई धर्म के लोगों के बीच इसे होली फ्राइडे, ब्लैक फ्राइडे और ग्रेट फ्राइडे भी कहा जाता है। इस दिन चर्च में लोग काले कपडे़ पहनकर जाते हैं और प्रार्थना करते हैं। ईसाई धर्म के अलावा अन्यि धर्म के लोग भी इस दिन चर्च में जाकर प्रार्थना करते हैं और प्रभु यीशू से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं।



6 घंटे तक सूली पर लटकाया गया था 
यीशू को अत्याचारियों  और पापियों ने मिलकर भयंकर यातनाएं दीं और उन्हें  सूली पर चढ़ा दिया गया। सूली पर चढ़ाने से पहले उन्हेंं कांटों का ताज पहनाया गया। इतने पर भी उनके मुंह से आखिरी वक्ती में ये ही शब्दह निकले, ‘हे ईश्वतर, इन्हेंी क्षमा करें, ये नहीं जानते कि ये क्याह कर रहे हैं’ 
ईसाइयों के पवित्र ग्रंथ बाइबिल में बताया गया है कि प्रभु यीशू को 6 घंटे तक सूली पर लटकाया गया था। ईसाई धर्म में बताया जाता है कि जब उन्हेंप सूली पर लटकाया गया था, तो आकाश में अचानक से अंधेरा हो गया। बिजली चमक रही थी इसलिए गुड फ्राइडे के दिन चर्च में कोई समारोह नहीं होता बल्कि केवल प्रार्थना सभाएं होती हैं।