संकट के समय में रोटी के लिए गरीबों ने बदला व्यवसाय


लखनऊ। कोरोना वायरस की महामारी से पैदा हुए रोजी-रोटी के संकट से निपटने के लिये अब गरीब ने अपना व्यवसाय ही बदल लिया है। फुटपाथ पर चाउमीन, चाट, चाय, समोसा तथा अंडा बेचने वाले लोग फल व सब्जी बेचने लगे हैं । इससे  शहर में फल व सब्जी बेचने वालों की संख्या बढ़ गई है। 


राजधानी में हजारों लोग सड़कों पर दुकान लगा कर अपना व परिवार का पेट पालते थे। इसमें से बहुत से लोग खाने-पीने की दुकानें ठेले व फुटपाथ पर लगाते थे। बड़ा तबका इनकी दुकानों पर चाउमीन, चाट, छोले, भटूरे समोसे, चाय व अंडे खाता पीता था। इसके अलावा भी तमाम लोग छोटी मोटी दुकानें फुटपाथ पर लगा कर गुजारा करते थे। लेकिन लाक डाउन होने से यह सब बंद हो गई हैं। केवल सब्जी व फल की दुकानें ही लगाने की अनुमति जिला प्रशासन ने दी है। ऐसे में अब इन दुकानदारों ने अपनी रोजी-रोटी चलाने के लिए अपना व्यवसाय बदल दिया है। सैकड़ों लोग सड़कों पर सब्जी व फल बेचने लगे हैं। इससे वह दिन भर में अपने खाने-पीने पर का जुगाड़ आसानी से कर ले रहे हैं। इसी का नतीजा है कि अब मोहल्लों व बाज़ारों में फल व सब्जी वाले ठेले ज्यादा दिखाई देने लगे हैं।


 लोगों ने कहा भूखे रहने व हाथ फैलाने से अच्छा खुद कुछ करके कमाए
आशियाना चौराहे के पास अंडे का ठेला लगाने वाला राजू अब केले बेच रहा है। राजू ने बताया कि 3 दिन वह घर में बैठा था। झोपड़ी में रहता है। फिर खाने पीने की दिक्कत हुई तो उसने फल का ठेला लगाना शुरू किया। उसने बताया कि अब शाम तक परिवार के खाने पीने भर की कमाई कर लेता है। इसी तरह ठेले पर छोटे-छोटे सामान कैंची, कंघी, रुमाल, मोजे बेचने वाला राघव अब बंगला बाजार में सब्जी बेचना शुरू किया है। उसने बताया कि दिक्कत ज्यादा होने लगी थी। प्रशासन ने सब्जी बेचने की छूट दी थी इसलिए वह सुबह साइकिल से मंडी से सब्जी खरीद कर लाता है। फिर ठेले पर रखकर बेचता है। एलडीए कॉलोनी कानपुर रोड के ईडब्लूएस मकान में रहने वाले कल्लू ने बताया कि पहले वह चाऊमीन बेचता था। उसकी पत्नी घरों में झाड़ू पोछा करती थी। दोनों का काम बंद हो गया। ऐसे में अब उसने भी सब्जी की दुकान लगानी शुरू कर दी है।