नोएडा की भरी मीटिंग में डीएम पर नाराज हुए सीएम योगी


ग्रेटर नोएडा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को बैठक करने गौतमबुध नगर आए तो शुरू से ही उनके तेवर तीखे थे। सीएम ने बैठते ही सबसे पहले नोएडा की सीज फायर कंपनी में आए लंदन के युवक और उसके कारण जिले में फैले संक्रमण पर सवाल किया। इसके बाद दिल्ली की ओर से आए प्रवासी मजदूरों पर बात की।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी और जिलाधिकारी ने जवाब देने की कोशिश की। लेकिन सीएम ने नाइत्तेफाकी जाहिर कर दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को सीधे बोल दिया कि वह इन इंतजामों से खुश नहीं है। सही मायने में अच्छे ढंग से इंजाम नहीं किए गए हैं। ब्रिटिश नागरिक से फैले संक्रमण पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सही ढंग से सूचनाएं नहीं दी जा सकीं। सीएमओ और डीएम ने स्पष्टीकरण दिया और तैयारियां बताईं लेकिन सीएम ने उहें खारिज कर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्रिटेन से आए नागरिक को लेकर सतर्कता नहीं बरती गई। उसके संपर्क में आने वाले लोगों को सही तरह से जानकारी नहीं पहुंचाई गई। जिसकी वजह से यह परेशानी उत्पन्न हुई है। इस बारे में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अनुराग भार्गव ने स्पष्टीकरण भी दिया। डीएम ने इस मसले पर जवाब देने के लिए हाथ खड़ा किया तो प्रमुख सचिव ने उन्हें रोक दिया।


नोएडा में सबसे ज्यादा मामले : 
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में अब तक कोरोना वायरस के जितने मामले सामने आए हैं, उनमें सबसे ज्यादा गौतमबुद्ध नगर में हैं। इससे सरकार बेहद चिंतित है। नोएडा की सीज फायर कंपनी में ब्रिटेन से ऑडिटर आया था। उस व्यक्ति के संपर्क में आने के कारण अब तक कंपनी से जुड़े अधिकारी, कर्मचारी और उनके परिवार के 19 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। इनमें नोएडा और ग्रेटर नोएडा, दोनों शहरों में रहने वाले लोग शामिल हैं। गौतमबुद्ध नगर में अभी तक 37 मामले सामने आए हैं। इनमें से 21 मामले अकेले ब्रिटिश नागरिक से जुड़े हैं। अफसरों ने बताया कि आगे संपर्क में आने वाले लोगों को पहचान लिया गया है। कुछ लोगों में लक्षण दिखने पर उन्हें तत्काल उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। इस संक्रमण के लिए जिम्मेदार कंपनी के मैनेजमेंट पर एफआईआर दर्ज करवाई गई है। इसी मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाराजगी जाहिर की है।


प्रवासी मजदूरों से जुड़ी सूचनाएं नहीं मिलीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार को प्रवासी मजदूरों से जुड़ी समस्या के बारे में सही जानकारी नहीं दी गई। उन लोगों के रहने और खाने के लिए उचित व्यवस्था नहीं की गई। गौतमबुद्ध नगर से सही सूचनाएं नहीं मिलने के कारण सरकार को फैसले लेने में परेशानी हुई है।