मजदूरों के पलायन पर केंद्र सरकार सख्त, राज्यों से कहा- सीमा सील कर दो और आवाजाही रोको


नई दिल्ली। केंद्र ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासनों से लॉकडाउन के दौरान प्रवासी कामगारों की आवाजाही को रोकने के लिए प्रभावी तरीके से राज्य और जिलों की सीमा सील करने को कहा है। मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान कैबिनेट सचिव राजीव गौबा और केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने उनसे सुनिश्चित करने को कहा कि शहरों में या राजमार्गों पर आवाजाही नहीं हो क्योंकि लॉकडाउन जारी है।


एक सरकारी अधिकारी ने बताया, ''देश के कुछ हिस्सों में प्रवासी कामगारों की आवाजाही हो रही है। निर्देश जारी किए गए हैं कि राज्यों और जिलों की सीमा को प्रभावी तरीके से सील करना चाहिए।" राज्यों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि शहरों में या राजमार्गों पर लोगों की आवाजाही नहीं हो। केवल सामान को लाने-ले जाने की अनुमति होनी चाहिए। राज्यों को उनलोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है, जो छात्रों अथवा मजदूरों से जगह खाली करने को कहता है।


अधिकारी ने बताया कि इन निर्देशों का पालन करवाने के लिए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की निजी तौर पर जिम्मेदारी बनती है। अधिकारी ने बताया कि प्रवासी कामगारों सहित जरूरतमंद और गरीब लोगों को खाना और आश्रय मुहैया कराने के लिए समुचित इंतजाम किए जाएंगे।


उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दुनिया भर में महामारी का रूप ले चुके कोरोना वायरस 'कोविड-19' से निर्णायक लड़ाई के लिए 24 मार्च की आधी रात से समूचे देश में 21 दिन के लॉकडाउन और 15 हज़ार करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा की थी। पीएम मोदी ने देशवासियों से हाथ जोड़कर विनती की कि वे अपने घर से बाहर बिल्कुल न निकलें क्योंकि इस जानलेवा वायरस के संक्रमण की श्रंखला को तोड़ने का यही एक मात्र रास्ता है।


केंद्र का राज्यों को निर्देश
प्रवासी मजदूरों की आवाजाही को रोकने के लिए राज्य और जिलों की सीमा को प्रभावी तरीके से सील की जाएं।
गरीब, जरूरतमंद लोगों, दिहाड़ी मजदूरों को भोजन, आश्रय मुहैया कराने के लिए समुचित इंतजाम किए जाएं।
राज्यों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि लॉकडाउन के दौरान राजमार्गों या शहरों में लोगों की आवाजाही नहीं हो।
इन निर्देशों का पालन कराने के लिए डीएम, एसपी को निजी तौर पर जिम्मेदार बनाया जाना चाहिए।


वहीं, प्रवासी मजदूरों के लिए शनिवार (28 मार्च) को सीमित संख्या में बस चलाने के उत्तर प्रदेश प्रशासन के फैसले के बाद अपने घर पहुंचने की जल्दी में बसों में सीट के लिए झगड़ा करते मजदूरों से दिल्ली-गाजियाबाद सीमा पूरी तरह पटी नजर आई जहां अफरातफरी और भगदड़ जैसे हालात बने हुए थे।


दिल्ली, हरियाणा और पंजाब के हजारों दिहाड़ी मजदूर कई किलोमीटर पैदल चलने के बाद बस पकड़ने के लिए आनंद विहार, गाजीपुर और गाजियाबाद के लाल कुआँ क्षेत्र पहुंचे। लोगों की संख्या अत्यधिक होने और बस में जगह न होने के कारण कई मजदूर बसों की छत पर बैठ गए। संक्रमण फैलने के खतरे के बीच सामाजिक दूरी के सारे नियम धरे रह गए और लोग बसों में जहां पांव टिकाने की जगह मिली वहीं खड़े नजर आए। इनमें से कुछ ने मास्क पहने थे, लेकिन ज्यादातर लोगों ने संक्रमण से बचने के लिए मुंह पर रुमाल बांधा था।