लॉकडाउन से पराग का दूध भंडार तीन गुना बढ़ा

दूध भंडारण ज्यादा, बिक्री कम होने से कमाई कम और खर्च बढ़ा राजस्व कम आने से कर्मचारियों का वेतन फंसा



लखनऊ। लॉकडाउन के बाद पराग का दूध भंडारण लगभग तीन गुना बढ़ गया है। पराग के पास यह बढ़ा दूध उसके लिए समस्याएं लेकर आया है। लखनऊ दुग्ध डेयरी के पास इस समय दूध भंडारण ज्यादा हो रहा है और बिक्री कम होने से कमाई कम और खर्च ज्यादा बढ़ गया है। ऐसे में राजस्व कम आने से कर्मचारियों का वेतन भी फंस गया। समितियों से दूध कलेंक्शन बढ़ालॉकडाउन के बाद प्रशासन ने शहर की चारबाग, ठाकुरगंज, आशियाना, सीतापुर समेत सभी दूध मंडियों को बंद करा दिया। यही नहीं जो दूधिया गली-मोहल्लों में जाकर दूध की बिक्री करते थे उनमें भी ज्यादातर पुलिस सख्ती के कारण आना बंद कर दिया। ऐसे में इन किसानों के पास पराग समितियां ही एक मात्र ठिकाना बची हैं अपना दूध बेचने के लिए। ऐसे में पराग में दूध कलेक्शन 80 हजार लीटर से बढ़कर एक लाख 60 हजार ली तक बढ़ गया। जबकि लखनऊ दुग्ध डेयरी के प्रबंधन के सभी प्रयासों के बाद 60 हजार लीटर दूध की बिक्री रोजाना की जा रही है। ऐसे में एक लाख लीटर दूध रोजाना डेयरी के पास दूध बच रहा है।दूध पाउडर बनाने को बढ़ी मुश्किलेंलखनऊ दूध डेयरी में बचे दूध का अभी तक मेरठ दूध डेयरी ही पाउडर बनाने का काम करती रही है। लेकिन लॉकडाउन के बाद मेरठ डेयरी ने भी लखनऊ से आने वाले दूध का पाउडर बनाने में हाथ खड़े कर दिए। पराग के महाप्रबंधक मृत्युंजय सिंह ने बताया कि अब पराग ने उच्च अधिकारियों से स्वीकृति लेकर इलाहाबाद की मंगलम कंपनी से दूध पाउडर बनाने का करार किया है। कर्मचारियों का फंसा वेतनपराग अपने किसानों को 10 दिन में दूध के पैसे का भुगतान करता है। ऐसे में पराग की जो कमाई हो रही है उससे किसानों का भुगतान किया जा रहा है। ऐसे में कर्मचारियों को वेतन देने के लिए रकम ही नहीं बच रही है। अभी तक फरवरी का वेतन संविदा और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को मिला है।