कोरोना से जंग में शिवराज और कमल नाथ ने गढ़ी रिश्तों की नई परिभाषा


भोपाल। मध्य प्रदेश में सत्ता के उलटफेर में जिम्मेदारियां भले बदल गई, लेकिन कोरोना के संकट से जूझने में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने जो सामंजस्य दिखाया उसकी सर्वत्र सराहना होने लगी है। जनता क‌र्फ्यू की सफलता के लिए कमल नाथ और शिवराज ने साझा अभियान चलाकर रिश्तों की नई परिभाषा गढ़ दी।


शिवराज और कमल नाथ के बीच शिष्टता और सामंजस्य का रिश्ता


कमल नाथ यह जानते थे कि अब सत्त्ता शिवराज के हाथों में जाने वाली है, इसलिए वह लगातार उनसे परामर्श लेते रहे और शिवराज यह कहकर कि अभी तो मुख्यमंत्री आप ही हैं, उन्हें भरपूर सम्मान देते रहे। यही वजह रही कि रविवार को पूरा मध्य प्रदेश कोरोना के खिलाफ तनकर खड़ा हो गया। शिवराज और कमल नाथ दोनों ही शिष्ट नेता माने जाते हैं। दोनों के बीच शिष्टता और सामंजस्य का ऐसा रिश्ता है, जो बहुतों में नहीं मिलता है।


कोरोना के संकट में शिवराज और कमल नाथ सारी कटुता भूल गए


पिछले एक महीने की सियासत पर गौर किया जाए तो शिवराज और कमल नाथ के बीच तलवारें खिंची हुई थीं। दोनों ही एक-दूसरे के खिलाफ कटुता भरे बयान भी दे रहे थे। सियासत के खेल में कमल नाथ की सरकार भी चली गई पर जैसे ही प्रदेश पर कोरोना का संकट आया, शिवराज और कमल नाथ सारी कटुता भूलकर साथ हो गए। हालांकि दोनों नेताओं के बीच की केमेस्ट्री के कई उदाहरण और भी हैं।


दोनों नेताओं ने सामाजिक सद्भाव की परंपरा को मजबूत किया


कमल नाथ ने तो छिंदवाड़ा में कहा भी था कि जब शिवराज मुख्यमंत्री थे तो मेरे लोकसभा क्षेत्र के किसी भी काम या बड़े प्रोजेक्ट को लागू करने से पहले मुझ से सलाह लिया करते थे। विरोध और विपक्ष के सार्वजनिक जीवन और राजनीति में रहते हुए भी दोनों नेताओं ने समय-समय पर ऐसी नजीर पेश की जो सामाजिक सद्भाव की परंपरा को न सिर्फ मजबूत करता है, बल्कि समाज में मिसाल भी कायम करता है।


कमल नाथ और शिवराज ने हमेशा एक दूसरे का रखा खयाल


कमल नाथ ने भी केंद्र सरकार में भूतल परिवहन मंत्री रहते हुए प्रदेश की सड़कों के लिए खूब बजट दिया। जब वे यहां प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बनकर आए तो तत्कालीन मुख्यमंत्री रहते हुए शिवराज ने उनके आवास को तैयार करने के लिए सात विभागों के प्रमुख सचिव को एक साथ भेजा। उनके इस फैसले की आलोचना भी हुई, लेकिन उन्होंने परवाह नहीं की। जब सत्ता परिवर्तन हुआ तो भी कमल नाथ ने परंपरा निभाई। शिवराज को न सिर्फ पूरी सुविधाएं उपलब्ध करवाई, बल्कि नियमों से हटकर उनके स्टाफ में संविदा पर डॉक्टर से लेकर निजी स्टाफ भी पदस्थ किया गया। शिवराज के हर पत्र का जवाब भी कमलनाथ दिया करते थे।