ऐसा हो रेखा का योग तो नहीं हो पाती विदेश यात्रा


विदेश यात्रा को लेकर व्‍यक्‍ति जीवन में जिज्ञासु बना रहता है। हर व्‍यक्‍ति चाहता है कि वह विदेश यात्रा पर जाए, लेकिन हस्‍तरेखा में विदेश यात्रा का बाकयदा योग बनता है। यदि रेखाओं का यह योग है तो चाहे कारण जो भी बनें, विदेश यात्रा होकर रहेगी। लेकिन रेखाओं का योग से ही बनी बनाई विदेश यात्रा भी रदद करनी पड़ सकती है। हस्‍तरेखा विशेषज्ञ जयप्रकाश वर्मा के अनुसार चंद्र पर्वत से निकलकर जब कोई रेखा भाग्य रेखा को काटती हुई जीवन रेखा में जाकर मिले तो व्यक्ति दुनियाभर के देशों की यात्रा करता है। यदि जीवन रेखा स्वतः घूमकर चंद्र पर्वत पर पहुंच जाए तो वह जातक अनेक दूरस्थ देशों की यात्राएं करता है और उसकी मृत्यु भी जन्मस्थान से कहीं बहुत दूर किसी अन्य देश में ही होती है।


मणिबंध से निकलकर कोई रेखा यदि मंगल पर्वत की ओर जाती हो तो वह व्यक्ति जीवन में समुद्री विदेश यात्राएं करता है। प्रथम मणिबंध से ऊपर उठकर चंद्र पर्वत पहुंचने वाली रेखाएं सर्वाधिक शुभ मानी जाती हैं। परिणामतः यात्रा सफल और लाभदायक होती है। यदि चंद्र पर्वत से उठने वाली आड़ी रेखाएं चंद्र पर्वत को ही पार करती हुई भाग्य रेखा में मिल जाएं तो दूरस्थ देशों की महत्वपूर्ण व फलदायी यात्राएं होती हैं। यदि किसी जातक के दाहिने हाथ में तो विदेश यात्रा रेखाएं हों और बायें हाथ में रेखाएं न हों अथवा रेखा के प्रारंभ में कोई क्रास या द्वीप हो तो विदेश यात्रा में कोई न कोई बाधा उत्पन्न हो जाएगी अथवा जातक स्वयं ही उत्साहहीन होकर विदेश यात्रा को रद्द कर देगा। यदि यात्रा रेखाएं टूटी-फूटी अथवा अस्पष्ट हो तो यात्रा का सिर्फ योग ही घटित होकर रह जाता है। प्रत्यक्ष में कोई यात्रा नहीं होगी। यात्रा रेखा पर यदि कोई क्रॉस हो तो यात्रा के दौरान एक्सीडेंट अथवा अन्य किसी दुखद घटना के होने की पूर्ण आशंका रहती है।


(इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं तथा इन्हें अपनाने से अपेक्षित परिणाम मिलेगा। जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)